ZEE News का हेड आफिस बना कोरोना हब

Zee News के 28 कर्मचारियों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।Zee News के तरफ से कल स्टेटमेंट जारी कर दी गई है।यही दुआ है कि सब जल्दी ठीक हो जाएं। किसी भी मीडिया संस्था के अंदर इतने सारे लोग कोरोना से संक्रमित होना चिंता की बात है। कुछ दिन पहले दैनिक जागरण के आगरा आफिस के कई कर्मचारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और उस में एक पत्रकार की मौत भी हो गई थी। कइनौर मीडिया संस्था के अंदर भी रिपोर्ट पॉजिटिव आये होंगे लेकिन कुछ संस्था छुपाते भी हैं। मेरे मन में कई सवाल आ रहे हैं। सबसे पहला सवाल यह है कि Zee News एक मीडिया संस्थान के अंदर इतने लोग कोरोना पॉजिटिव क्यों पाए गए हैं ? अब आप के दिमाग में यह सवाल आ रहा होगा कि मीडिया वाले कोई भगवान हैं कि उन्हें कोरोना नहीं होगा ?

आप लोग सही सोच रहे हैं लेकिन मैं कुछ अलग सोच रहा हूँ। मीडिया वाले ज्यादा समझदार माने जाते हैं। मीडिया में तो रोज दिखाया जाता है कि कोरोना को दूर रखने के लिए क्या क्या करना चाहिए? डॉक्टर सब बैठते हैं, सलाह देते हैं कि कैसे सोशल डिस्टनसिंग मेन्टेन करना है, मास्क पहनना है,हाथ बार बार धोना है, सैनिटाइजर से हाथ साफ करना है तो क्या मीडिया संस्थान के अंदर यह सब का पालन नहीं हो रहा था अगर हो रहा था तो फिर इतने संख्या में मीडिया कर्मी कोरोना से कैसे संक्रमित हो गए ? मीडिया वाले तो आम पब्लिक के लिए हर नियम कानून पालन करने के लिए कहते हैं तो क्या खुद नहीं करते हैं या फिर काम का इतना दवाब होता है कि कर नहीं पाते हैं?

दूसरी सवाल, ऐसे भी आजकल मीडिया संस्थानों में एंट्री से पहले बुखार चेक हो रहे होंगे फिर कोई कोरोना पॉजिटिव वाला आफिस के अंदर कैसे चला गया? थर्मल स्क्रीनिंग तो हुआ ही होगा ? इस में दो बात साफ है अगर थर्मल स्क्रीनिंग नहीं हो रही थी तो फिर वो संस्थान गलत कर रहा था अगर हो रही थी तो थर्मल स्क्रीनिंग पर सवाल उठना चाहिए ? सभी जानते हैं सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग से पता नहीं चलता है कि आप के अंदर कोरोना वायरस है या नहीं ? कई और लक्षण भी होते हैं जिसका टेस्ट नहीं होते हैं। कोरोना का लक्षण सिर्फ बुखार नहीं है। अगर आप को बुखार नहीं है इसका मतलब यह नहीं कि आप के अंदर कोरोना के वायरस नहीं होंगे ? कम से कम मीडिया संस्थानों को अपने सभी कर्मचारियों की कोरोना टेस्ट करवाना चाहिए।

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आप सबको अपने ज़िंदगी के बारे में सोचना चाहिए। अपना ध्यान रखना चाहिए.अपने परिवार के बारे में सोचिए।आफिस तो जाना पड़ेगा अगर नहीं जाएंगे तो तंखा नहीं मिलेगी लेकिन अपना ध्यान खुद रखिए। एडिटर लोग सब तो दवाब डालेगा काम करने के लिए लेकिन आप सबको हमेशा अपना दिमाग खुला रखना पड़ेगा। आप का कुछ होगा तो न एडिटर गिल्ड आप के साथ देगा न एडिटर लोग सब। आफिस के अंदर कैसे सोशल डिस्टनसिंग मेंटेन किये जायें यह सब पर ध्यान रखिये, मैं जानता हूँ यह सब कहना आसान है लेकिन फिर भी यह सबके बारे में शक्ति से सोचना पड़ेगा।कम से कम मास्क हमेशा पहनके रहिये। यह कहा जाता है कि मीडिया वाले corona वारियर हैं। किसी संस्था का आम कर्मचारी कभी वारियर नहीं होता है वो सिर्फ अपने लाइफ को रिस्क में डालके काम करता है। वो तो हमेशा worry रहता है वारियर तो एडिटर लोग सब होते हैं जो सोशल डिस्टनसिंग पालन करने के लिए केविन में बैठते हैं,स्टेटमेंट जारी करते हैं, मोटी तंखा भी लेते हैं।

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